
पंख भारी हो जाते हैं और वह भव्य उड़ान नहीं उड़ सकता, अब बाज क्या करें सबसे कठीन चयन जीवन का वह करता है।
चयन स्वयं की पुनर्स्थापना सर्वप्रथम किसी विशाल पर्वत पर जाता है वहां अपना घोंसला बनाता है फिर चट्टान पर अपनी चोट मार मार कर तोड़ देता है ,और अपने लंबे और लचीले नाखूनों को भी तोड़ देता है, और अपने भारी पंखों को एक-एक करके निकाल देता है ,फिर 150 दिनों की भारी पीड़ा सहने के पश्चात उसे मिलती है फिर वही भव्य उड़ान, और वही शक्ति और फिर वह अपने जीवन के 30 वर्ष जीता है ।
क्या समझे अगर इच्छाशक्ति हो तो दुर्बल भी बलि बन सकता है। आप भी अपने बीते हुए कल के अस्तित्व का भार त्याग दीजिए , और अपने जीवन की उन्मुक्त उड़ान भरीये स्वयं की पुनर्स्थापना कीजिए तभी सर्वश्रेष्ठ बनेंगे स्मरण रखिए यह छोटे-छोटे आरंभ ही बड़े-बड़े शिखर तक ले जाते हैं। - जय श्री कृष्ण
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